निगाहें

आँखों के पहरे

आँखों, यादों और खामोश मोहब्बत की कविता।

तेरी आँखों के पहरे में, मेरी रातें ठहर जाती हैं,

यादों की पतली गलियों से, तेरी बातें गुजर जाती हैं।

खामोशी भी तेरा नाम लिए, चुपके चुपके मुस्काती है,

और मेरी हर बेचैनी, तेरी निगाहों में घर पाती है।


कहना चाहूँ तो शब्द कम पड़ते हैं,

देखूँ तुझे तो दिन भी थम पड़ते हैं।

इन आँखों में जो उजाला है,

वही तो मेरे प्रेम का पहला हवाला है।

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