आँखों के पहरे
जहाँ प्रेम यादों की कैद जैसा महसूस होता है।
पढ़ेंकुसुम काव्यशाला – प्रेम, प्रतीक्षा और एहसासों का काव्य-संग्रह
उनके नाम, जिनके होने से शब्द कविता बन जाते हैं।
यह काव्यशाला उस खास शख्स को समर्पित है, जिसकी याद, मुस्कान, आँखें और खामोशी भी कविता बन जाती है।
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जहाँ प्रेम यादों की कैद जैसा महसूस होता है।
पढ़ेंसब्र और बेसब्री दोनों में बसा हुआ प्रेम।
पढ़ेंनज़ाकत और जुनून से भरी प्रेम की गली।
पढ़ेंसाथ बैठकर चाय पीने में छुपा हुआ अपनापन।
पढ़ेंएक ऐसा रोग जो दर्द भी है और दवा भी।
पढ़ेंवह प्रेम जो जीवन की सांस जैसा लगे।
पढ़ेंप्रेम के अलग-अलग रंग
“तुम्हारा होना ही मेरे लिए हवा जैसा है,
जरा से तुम इधर-उधर हुए तो सांस रुकने लगती है।”
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