अपनापन

सांसों की डोर

प्रिय के होने को हवा जैसा महसूस कराने वाली कविता।

तुम्हारा होना ही मेरे लिए हवा जैसा है,

जरा से तुम इधर-उधर हुए तो सांस रुकने लगती है।

तुम पास हो तो दिन में रोशनी रहती है,

तुम दूर हो तो धड़कन भी थकने लगती है।


सांसों की डोर तुमसे ही बंधी है,

मेरी हर सुबह तेरी याद से सजी है।

तुम रहो तो जीवन कविता लगता है,

तुम बिन हर शब्द अधूरा लगता है।

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