इश्क़

मोहब्बत के सजदे

प्रेम को इबादत मानने वाला कोमल और पवित्र भाव।

मोहब्बत के सजदे में सिर झुकता नहीं, दिल झुकता है,

तेरा नाम आए तो हर डर चुपचाप रुकता है।

तू कोई मंदिर नहीं, फिर भी पवित्र लगती है,

तेरी याद में उठी दुआ मुकम्मल लगती है।


मैंने प्रेम को तेरे रूप में जाना है,

हर शिकायत में भी अपनापन माना है।

तेरे लिए जो भाव दिल में उठता है,

वही मेरी सबसे सच्ची इबादत है।

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