चाय और साथ

चाय हम और तुम

चाय में घुली मोहब्बत, आदत और इबादत का भाव।

एक कप चाय, थोड़ी सी बारिश, और तुम,

इतना हो तो दुनिया से क्या लेना।

भाप में उठते हुए तेरे ख़याल,

और होंठों पर ठहरा हुआ मुस्काना।


चाय सिर्फ चाय कहाँ रहती है,

जब सामने तुम बैठी होती हो।

हर घूंट में बातों का सुकून घुलता है,

हर चुप्पी भी अपनी सी लगती है।

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