इश्क़
इश्क दी गली
इश्क़ की बेकरारी, गुरूर और एकतरफा सुरूर का रंग।
इश्क दी गली विच कदम रखा तो जाना,
यहाँ रास्ते कम, एहसास ज़्यादा होते हैं।
कभी तेरी हँसी से दिल को सुकून मिलता है,
कभी तेरी चुप्पी से सवाल पैदा होते हैं।
तेरे नाम का सुरूर भी कमाल करता है,
बेकरारी को भी सजाकर ख़याल करता है।
इश्क़ अगर गुनाह है तो ये गुनाह मंज़ूर,
तेरे बिना कोई भी रास्ता नहीं भरपूर।