दिल की गहराई

प्रेम रोग

प्रेम, प्रतीक्षा, मिलन और दूरी के भावों की कविता।

प्रेम रोग लगा है जबसे, चैन कहीं ठहरता नहीं,

तेरे बिना ये दिल अपना ही घर लगता नहीं।

दूरी में भी तेरी खुशबू साथ चलती है,

मिलन की आस हर शाम नई तरह पलती है।


ये रोग अजीब है, शिकायत भी प्यारी लगती है,

तेरे नाम की हर बेचैनी दवा सी लगती है।

तुम मिलो तो सांसें फूल बन जाएँ,

न मिलो तो यादें आँचल बन जाएँ।

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