कुसुम काव्यशाला – प्रेम, प्रतीक्षा और एहसासों का काव्य-संग्रह

कुसुम काव्यशाला

उनके नाम, जिनके होने से शब्द कविता बन जाते हैं।

कुछ एहसास कहे नहीं जाते,
बस कविता बनकर दिल में उतर जाते हैं।

यह काव्यशाला उस खास शख्स को समर्पित है, जिसकी याद, मुस्कान, आँखें और खामोशी भी कविता बन जाती है।

Featured Poems

दिल के करीब कविताएँ

सभी कविताएँ
आँखें, यादें, निगाहें

आँखों के पहरे

जहाँ प्रेम यादों की कैद जैसा महसूस होता है।

पढ़ें
प्रतीक्षा और बेचैनी

इंतज़ार

सब्र और बेसब्री दोनों में बसा हुआ प्रेम।

पढ़ें
इश्क़, बेकरारी, नज़ाकत

इश्क दी गली

नज़ाकत और जुनून से भरी प्रेम की गली।

पढ़ें
चाय, साथ और सुकून

चाय हम और तुम

साथ बैठकर चाय पीने में छुपा हुआ अपनापन।

पढ़ें
गहरा प्रेम, एहसास, दूरी

प्रेम रोग

एक ऐसा रोग जो दर्द भी है और दवा भी।

पढ़ें
जीवन जैसा प्रेम

सांसों की डोर

वह प्रेम जो जीवन की सांस जैसा लगे।

पढ़ें

प्रेम के अलग-अलग रंग

हर एहसास की अपनी जगह

इंतज़ार का प्रेम जब प्रेम प्रतीक्षा बन जाए
आँखों वाला प्रेम निगाहों, यादों और खामोशी का प्रेम
इश्क़ की गली बेकरारी, नज़ाकत और जुनून
चाय और तुम साथ बैठने, बातें करने और सुकून का प्रेम
दिल की बात गहरा, छुपा हुआ और सच्चा प्रेम
बाहों का सुकून अपनापन और सुरक्षा का एहसास
मोहब्बत के सजदे प्रेम को इबादत मानने वाला भाव
सांसों की डोर वह प्रेम जो जीवन जैसा लगे
कलम और नाम जब प्रिय का नाम कविता बन जाए
जुल्फ़ों की छांव नज़ाकत, खूबसूरती और आकर्षण
“तुम्हारा होना ही मेरे लिए हवा जैसा है,
जरा से तुम इधर-उधर हुए तो सांस रुकने लगती है।”

Latest Poems

नई पढ़ने लायक पंक्तियाँ